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पथराव के बाद आंसू गैस… उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर बवाल, शाही मस्जिद पर हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले बढ़ा तनाव

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव बढ़ा, शाही मस्जिद के पास पथराव के बाद पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। हाईकोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई होगी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ujjain Simhastha 2028: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर तक चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी परियोजना की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध तेज हो गया।

धार्मिक स्थलों पर बढ़ा विवाद

प्रशासन के मुताबिक, सड़क निर्माण में बाधा बन रहे करीब 60 धार्मिक स्थलों में से अधिकांश को हटाया जा चुका है। हालांकि शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर के पास स्थित मजार को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रभावित हिस्से में कार्रवाई की आशंका के बीच शनिवार रात से क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुटने लगी और नारेबाजी शुरू हो गई।

पथराव के बाद पुलिस ने संभाला मोर्चा

रविवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कार्रवाई के दौरान पथराव की घटना सामने आई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लोगों को वहां से हटाने की कोशिश की। संभावित विरोध को देखते हुए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ करीब 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। कंठाल-गोपाल मंदिर मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही सीमित कर दी गई। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी भी की गई। विरोध का सिलसिला रविवार रात तक जारी रहा। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

मस्जिद के प्रभावित हिस्से पर हाईकोर्ट में सुनवाई

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई रोकने के लिए मुस्लिम समाज की ओर से इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है। अब सबकी नजर अदालत के रुख पर है। यदि कानूनी रोक नहीं लगती है, तो सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले अन्य बाधक धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

सिंहस्थ 2028 से पहले शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की इस परियोजना के बीच प्रशासन के सामने विकास कार्य और कानून-व्यवस्था, दोनों को संभालने की चुनौती बनी हुई है।

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